परम्परा और संस्कृति का अनुशरण करते हुए हम रहते हैं सालो भर त्योहारों को मानाने में ,
जिसमें उत्तरी-भारत व्यस्त है माँ का अनुशरण करने में वहीं दक्षिण-भारत व्यस्त है उगाधि को मनाने में |
उसमे भी अभी चतुर्दिक सरगर्मी है राजनीतिक-दावेदारों की ,
किसको कितना सीट मिलेगा भरा है आज का अख़बार और इलेक्ट्रानिक मीडिया इनके सर्वेक्षण में |
अबकी बार मोदी सरकार की जहाँ गूँज रहा है नारा वहीं 'आप' की हो गयी है धूमिल छाया ,
कांग्रेस विचारे दर्द का मारे पड़ गए हैं सोच में कौन सा जादू काम करेगा मोदी सरकार को हराने में |
विचारी जनता भी एक तरफ जहाँ विवश है परम्पराओं और त्योहारों को मनाने में ,
वहीं महँगाई आवाज लगा रही है और हम फिर से आशा और उम्मीद की किरण देख रहें हैं मोदी सरकार में |
जनता की चाहत को अब पूरा करना ध्येयासक्ती हो सकती है मोदी सरकार की ,
लेकिन उसके लिए शायद पूर्ण-बहुमत वाली सरकार लाना जरुरी है -
नहीं तो फिर से ममता और ललिता की जोड़ी के तहत इतिहास दोहराया जायेगा
फिर ना तुम(जनता) दोष देना मोदी सरकार को जिसने ललकार कार माँगा है हमसे वो साठ महिना |
जो भी हो हमें तो परम्पराओं को मानना ही है और इसी हलचल में अपनी सरकार(परिवार) चलानी है !!!

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